श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.19.25 
प्रभु कहेन, - ‘आचार्य हय पूजक प्रबल ।
आगम - शास्त्रेर विधि - विधाने कुशल ॥25॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "अद्वैत आचार्य भगवान के महान उपासक हैं और वैदिक साहित्य में वर्णित नियामक सिद्धांतों में बहुत निपुण हैं।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, “Advaita Acharya is a great worshipper of the Lord and is well versed in the rituals prescribed in the Vedic literature.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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