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श्लोक 3.19.15  |
जगदानन्द नदीया गिया मातारे मिलिला ।
प्रभुर यत निवेदन, सकल कहिला ॥15॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार जगदानन्द पंडित नादिया के पास गए और जब उनकी मुलाकात शचीमाता से हुई तो उन्होंने भगवान के सभी अभिवादन उन्हें बताये। |
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| Jagadananda Pandit thus returned to Nadia and when he met Sachimata, he conveyed Mahaprabhu's greetings to her. |
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