श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  3.19.111 
चैतन्य - चरितामृत - नित्य - नूतन ।
शुनिते शुनिते जुड़ाय हृदय - श्रवण ॥111॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य-चरितामृत सदैव ताज़ा रहता है। जो इसे बार-बार सुनता है, उसका हृदय और कान शांत हो जाते हैं।
 
The Sri Chaitanya Charitamrita is ever new. Listening to it repeatedly calms one's heart and ears.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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