पद्मिनी - लता - सखी - चय, कैल कारो सहाय
तरङ्ग - हस्ते पत्र समर्पिल ।
केह मुक्त - केश - पाश, आगे कैल अधोवास
हस्ते केह कञ्जलि धरिल ॥91॥
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अनुवाद
"कमल के तने गोपियों के मित्र थे और इसलिए उन्हें कमल के पत्ते देकर उनकी सहायता करते थे। कमल अपने बड़े, गोल पत्तों को अपने हाथों से, यमुना की लहरों से, पानी की सतह पर धकेलकर गोपियों के शरीर को ढकते थे। कुछ गोपियों ने अपने केश खोलकर उन्हें अपने शरीर के निचले हिस्से को ढकने के लिए वस्त्र की तरह अपने सामने रखा और अपने हाथों से अपने वक्षों को चोली की तरह ढक लिया।"
“Kamalnal was a friend of the Gopis, who helped them by giving them lotus leaves.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥