श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.18.79 
‘अर्ध - बाह्य’ कहेन प्रभु प्रलाप - वचने ।
आकाशे कहेन प्रभु, शुनेन भक्त - गणे ॥79॥
 
 
अनुवाद
इस अर्ध-बाह्य चेतना में, श्री चैतन्य महाप्रभु पागलों की तरह बोलते थे। भक्त उन्हें आकाश से बात करते हुए स्पष्ट रूप से सुन सकते थे।
 
In this semi-external consciousness, Sri Chaitanya Mahaprabhu spoke like a madman. Devotees could clearly see him speaking to the sky.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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