किबा ब्रह्म - दैत्य, किबा भूत, कहने ना याय ।
दर्शन - मात्रे मनुष्येर पैशे सेइ काय ॥51॥
अनुवाद
“मुझे नहीं पता कि जो शव मुझे मिला वह किसी मृत ब्राह्मण का भूत था या किसी साधारण मनुष्य का, लेकिन जैसे ही कोई उस पर दृष्टि डालता है, भूत उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है।
“I do not know whether that corpse was the ghost of a dead Brahmin or of an ordinary person, but as soon as anyone sees it, it enters his body.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)