श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.18.15 
भक्तेर प्रेम - विकार दे खि’ कृष्णेर चमत्कार! ।
कृष्ण यार ना पाय अन्त, केबा छार आर ? ॥15॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण भी अपने भक्तों में आनंद के परिवर्तन देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। यदि स्वयं कृष्ण ऐसी भावनाओं की सीमा का अनुमान नहीं लगा सकते, तो अन्य लोग कैसे लगा सकते हैं?
 
Even Lord Krishna is astonished by the emotional turmoil of his devotees. If Krishna himself cannot fathom the limits of such emotions, how can others?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)