श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  3.18.120 
एइ त कहिलुँ प्रभुर समुद्र - पतन ।
इहा येइ शुने, पाय चैतन्य - चरण ॥120॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के समुद्र में गिरने की घटना का वर्णन किया है। जो कोई इस लीला को सुनेगा, वह अवश्य ही श्री चैतन्य महाप्रभु के चरणकमलों की शरण प्राप्त करेगा।
 
Thus I have described the incident of Sri Chaitanya Mahaprabhu falling into the ocean. Whoever listens to this pastime will surely take refuge in the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)