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श्लोक 3.18.119  |
तबे स्वरूप - गोसाञि ताँरे स्नान करा ञा ।
प्रभुरे लञा घर आइला आनन्दित ह ञा ॥119॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् स्वरूप दामोदर गोस्वामी ने भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु को समुद्र में स्नान कराया और फिर वे उन्हें बहुत प्रसन्नतापूर्वक घर वापस ले आये। |
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| Thereafter Swaroop Damodar Goswami bathed Sri Chaitanya Mahaprabhu in the sea and then brought him home with great joy. |
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