श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  3.18.117 
प्रभु कहे, - “स्वप्ने दे खि’ गेलाङवृन्दावने ।
देखि, - कृष्ण रास करेन गोपीगण - सने ॥117॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "मैं स्वप्न में वृन्दावन गया था, जहाँ मैंने भगवान कृष्ण को सभी गोपियों के साथ रास नृत्य करते देखा।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “I went to Vrindavan in my dream, where I saw Lord Krishna dancing the Raas dance with all the Gopis.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)