श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  3.18.112 
“यमुनार भ्रमे तुमि समुद्रे पड़िला ।
समुद्रेर तरङ्गे आसि, एत दूर आइला! ॥112॥
 
 
अनुवाद
"तुमने समुद्र को यमुना नदी समझ लिया और उसमें कूद पड़े। समुद्र की लहरें तुम्हें यहाँ तक बहा ले आईं।"
 
"You mistook the ocean for the Yamuna River and jumped into it. You were carried this far by the waves.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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