श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  3.18.110 
एतेक कहिते प्रभुर केवल ‘बाह्य’ हैल ।
स्वरूप - गोसाञि रे देखि’ ताँहारे पुछिल ॥110॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर श्री चैतन्य महाप्रभु पूर्णतः बाह्य चेतना में लौट आए। स्वरूप दामोदर गोस्वामी को देखकर भगवान ने उनसे प्रश्न किया।
 
Having said this, Sri Chaitanya Mahaprabhu fully returned to his external consciousness. Seeing Svarupa Damodara Goswami, Mahaprabhu asked:
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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