श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 18: महाप्रभु का समुद्र से बचाव  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  3.18.109 
हेन - काले मोरे धरि, महा - कोलाहल क रि’,
तुमि - सब इहाँ लञा आइला ।
काँहा यमुना, वृन्दावन, काँहा कृष्ण, गोपी - गण,
सेइ सुख भङ्ग कराइला!” ॥109॥
 
 
अनुवाद
"अचानक तुम सबने बड़ा कोलाहल मचाया और मुझे उठाकर यहाँ वापस ले आए। अब यमुना नदी कहाँ है? वृंदावन कहाँ है? कृष्ण और गोपियाँ कहाँ हैं? तुमने मेरा सुखद स्वप्न तोड़ दिया है!"
 
“Suddenly you people created a loud noise and picked me up and brought me here again.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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