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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 17: श्री चैतन्य महाप्रभु के शारीरिक विकार  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.17.60 
हा हा कृष्ण प्राण - धन, हा हा पद्म - लोचन
हा हा दिव्य सद्गुण - सागर! ।
हा हा श्याम सुन्दर, हा हा पीताम्बर - धर
हा हा रास - विलास नागर ॥60॥
 
 
अनुवाद
"हाय! मेरे जीवन के निधि कृष्ण कहाँ हैं? कमल-नेत्र वाले कहाँ हैं? हाय! समस्त दिव्य गुणों का दिव्य सागर कहाँ है? हाय! पीले वस्त्र पहने हुए सुंदर श्यामवर्णी युवक कहाँ है? हाय! रास नृत्य का नायक कहाँ है? हाय! मेरे जीवन के निधि कृष्ण कहाँ हैं? हाय! मेरे जीवन के निधि कृष्ण कहाँ हैं? हाय! मेरे जीवन के निधि कृष्ण कहाँ हैं? हाय! मेरे जीवन के निधि कमल-नेत्र कहाँ हैं? हाय! समस्त दिव्य गुणों का दिव्य सागर कहाँ है? हाय! मेरे जीवन के प्रिय कृष्ण कहाँ हैं ...
 
"Alas! Where is Krishna, the treasure of my life? Where are those lotus-eyed ones? Alas! Where is that divine ocean of all transcendental virtues? Alas! Where is that handsome dark-complexioned youth wearing yellow clothes? Alas! Where is the hero of the Rasa dance?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)