श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 17: श्री चैतन्य महाप्रभु के शारीरिक विकार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.17.14 
तबे स्वरूप - गोसाञि सङ्गे लञा भक्त - गण ।
देउटि ज्वालिया करेन प्रभुर अन्वेषण ॥14॥
 
 
अनुवाद
तब स्वरूप दामोदर गोस्वामी ने एक मशाल जलाई और सभी भक्तों के साथ श्री चैतन्य महाप्रभु की खोज में निकल पड़े।
 
Then Swarupa Damodara Goswami lit a lamp and went out with all the devotees to search for Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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