vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान
»
श्लोक 9
श्लोक
3.16.9
गौड़ - देशे हय यत वैष्णवेर गण ।
सबार उच्छिष्ट तेंहो करिल भोजन ॥9॥
अनुवाद
कालिदास ने बंगाल में जितने भी वैष्णव थे, उन सभी के भोजन के अवशेष खाये।
Kalidasa had eaten the leftovers of all the Vaishnavas in Bengal.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas