श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  3.16.81 
तारे बले , - ‘कोथा कृष्ण, मोर प्राण - नाथ? ।
मोरे कृष्ण देखाओ’ बलि’ धरे तार हात ॥81॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने उससे पूछा, "कृष्ण कहाँ हैं, मेरे प्राण और आत्मा? कृपया मुझे कृष्ण के दर्शन कराएँ।" यह कहकर उन्होंने द्वारपाल का हाथ पकड़ लिया।
 
Mahaprabhu asked him, "Where is my beloved Krishna? Show me Krishna." Saying this, he took the doorman by the hand.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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