श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  3.16.66 
पुत्र सङ्गे लञा तेंहो आइला प्रभु - स्थाने ।
पुत्रेरे कराइला प्रभुर चरण वन्दने ॥66॥
 
 
अनुवाद
अपने पुत्र को साथ लेकर शिवानन्द सेना श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने उनके निवास पर गए। उन्होंने अपने पुत्र से भगवान के चरणकमलों में सादर प्रणाम करवाया।
 
Shivananda Sen took his son to Sri Chaitanya Mahaprabhu's residence to have his darshan. He had his son offer his respectful obeisances at Mahaprabhu's lotus feet.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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