श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  3.16.64 
नीलाचले महाप्रभु रहे एइ - मते ।
कालिदासे महा - कृपा कैला अलक्षिते ॥64॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु जगन्नाथ पुरी, नीलांचल में रहे और उन्होंने अदृश्य रूप से कालिदास पर महान कृपा की।
 
In this way, Sri Chaitanya Mahaprabhu stayed in Jagannathpuri i.e. Nilachal and indirectly bestowed great blessings on Kalidasa.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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