श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.16.63 
तिन हैते कृष्ण - नाम - प्रेमेर उल्लास ।
कृष्णेर प्रसाद, ताते ‘साक्षी’ कालिदास ॥63॥
 
 
अनुवाद
इन तीनों से ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त होता है - कृष्ण का परमानंदमय प्रेम। यही भगवान कृष्ण की परम कृपा है। इसका प्रमाण स्वयं कालिदास हैं।
 
Through these three, man attains the ultimate goal of life—love of Krishna. This is the greatest blessing of Lord Krishna. Kalidasa is living proof of this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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