श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.16.56 
महाप्रभुर इङ्गित गोविन्द सब जाने ।
कालिदासेरे दिल प्रभुर शेष - पात्र - दाने ॥56॥
 
 
अनुवाद
गोविंद श्री चैतन्य महाप्रभु के सभी संकेत समझ गए। इसलिए उन्होंने तुरंत श्री चैतन्य महाप्रभु के भोजन के अवशेष कालिदास को दे दिए।
 
Govinda knew all the signals of Sri Chaitanya Mahaprabhu. Therefore, he immediately gave the remaining Prasadam of Sri Chaitanya Mahaprabhu's meal to Kalidasa.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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