श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.16.5 
ताँ - सबार सङ्गे आइल कालिदास नाम ।
कृष्ण - नाम विना तेंहो नाहि कहे आन ॥5॥
 
 
अनुवाद
बंगाल से आए भक्तों के साथ कालिदास नाम के एक सज्जन भी आए थे। वे कृष्ण के पवित्र नाम के अलावा कभी कुछ नहीं बोलते थे।
 
A gentleman named Kalidasa came with the devotees from Bengal. He would utter nothing but the holy name of Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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