श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.16.46 
एक अञ्जलि, दुइ अञ्जलि, तिन अञ्जलि पिला ।
तबे महाप्रभु ताँरे निषेध करिला ॥46॥
 
 
अनुवाद
कालिदास ने एक घूँट भर पानी पिया, फिर दूसरा और तीसरा। तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने उन्हें और पीने से मना किया।
 
Kalidasa drank a handful of water, then a second and a third. Then Sri Chaitanya Mahaprabhu forbade him from drinking any more.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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