श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.16.38 
एइ - मत यत वैष्णव वैसे गौड़ - देशे ।
कालिदास ऐछे सबार निला अवशेषे ॥38॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कालिदास ने बंगाल में रहने वाले सभी वैष्णवों द्वारा छोड़े गए भोजन के अवशेषों को खाया।
 
In this way Kalidasa ate the leftovers of all the Vaishnavas living in Bengal.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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