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श्लोक 3.16.24  |
तबे कालिदास श्लोक प ड़ि’ शुनाइल ।
शुनि’ झडु - ठाकुरेर बड़ सुख ह - इल ॥24॥ |
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| अनुवाद |
| तब कालिदास ने कुछ श्लोक सुनाये, जिन्हें सुनकर झाडू ठाकुर बहुत प्रसन्न हुए। |
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| Then Kalidasa recited some verses, hearing which Jhadu Thakur became very happy. |
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