श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.16.24 
तबे कालिदास श्लोक प ड़ि’ शुनाइल ।
शुनि’ झडु - ठाकुरेर बड़ सुख ह - इल ॥24॥
 
 
अनुवाद
तब कालिदास ने कुछ श्लोक सुनाये, जिन्हें सुनकर झाडू ठाकुर बहुत प्रसन्न हुए।
 
Then Kalidasa recited some verses, hearing which Jhadu Thakur became very happy.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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