श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.16.22 
एक वाञ्छा हय , - यदि कृपा करि’ कर ।
पाद - रज देह’, पाद मोर माथे धर” ॥22॥
 
 
अनुवाद
"हे महाराज, मेरी एक इच्छा है। कृपया मुझ पर कृपा करें और अपने चरण मेरे सिर पर रखें, ताकि आपके चरणों की धूल मेरे सिर को छू सके।"
 
"My lord, I have a wish. Please place your foot on my head so that the dust from your feet may touch my head."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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