श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 16: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा कृष्ण के अधरों का अमृतपान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.16.20 
कालिदास कहे , - “ठाकुर, कृपा कर मोरे ।
तोमार दर्शने आइनु मुइ पतित पामरे ॥20॥
 
 
अनुवाद
कालिदास ने उत्तर दिया, "हे महाराज, मुझ पर अपनी कृपा कीजिए। मैं आपसे मिलने आया हूँ, हालाँकि मैं बहुत पतित और पापी हूँ।"
 
Kalidasa replied, "O Sir, please be kind to me. I have come to see you, even though I am a very lowly and sinful person.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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