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अध्याय 15: श्री चैतन्य महाप्रभु का दिव्य उन्माद
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श्लोक 62
श्लोक
3.15.62
विशाखारे राधा यैछे श्लोक कहिला ।
सेइ श्लोक महाप्रभु पड़िते लागिला ॥62॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने तब निम्नलिखित श्लोक सुनाया, जो श्रीमती राधारानी ने अपनी प्रिय सखी विशाखा से कहा था।
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu recited the following verse, which Srimati Radharani had said to her dear friend Visakha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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