उलु, बौल, कर्ताबाज, नेदा, दरवेश, सांगी,
सहजिया, सखी-वेषी, स्मार्त, जगत-गोसाईं,
अतिवादी, चूड़ाधारी, गौरांग-नागरी
स्वरूप दामोदर गोस्वामी और रघुनाथ दास गोस्वामी ने चैतन्य महाप्रभु की गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उन्हें दो नोटबुक में दर्ज किया| इसलिए, इन नोटबुक्स के संदर्भ के बिना श्री चैतन्य महाप्रभु की गतिविधियों को समझना संभव नहीं है| श्री चैतन्य महाप्रभु की पूजा के लिए कोई नया तरीका ईजाद करने वाला निश्चित रूप से भगवान के लीलाओं को समझने में असमर्थ है, क्योंकि वह भगवान से संपर्क करने की वास्तविक प्रक्रिया से रहित है|
