श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  3.13.99 
एत बलि’ झालि वहेन, करेन सेवने ।
रघुनाथेर तारक - मन्त्र जपेन रात्रि - दिने ॥99॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रामदास ने रघुनाथ भट्ट का सामान ढोया और उनकी निष्ठापूर्वक सेवा की। वे दिन-रात भगवान रामचन्द्र के पवित्र नाम का निरंतर जप करते रहे।
 
Thus Ramdas continued to carry Raghunath Bhatt's luggage and faithfully serve him. He continued to chant the holy name of Lord Ramachandra day and night.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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