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अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ
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श्लोक 98
श्लोक
3.13.98
सङ्कोच ना कर तुमि, आमि - तोमार ‘दास’ ।
तोमार सेवा करिले हय हृदये उल्लास” ॥98॥
अनुवाद
“इसलिए कृपया संकोच न करें। मैं आपका सेवक हूँ, और जब मैं आपकी सेवा करता हूँ तो मेरा हृदय प्रसन्न हो जाता है।”
"So please don't hesitate. I am your slave, and my heart swells with joy when I serve you."
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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