श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  3.13.92 
सर्व - शास्त्रे प्रवीण, काव्य - प्रकाश - अध्यापक ।
परम - वैष्णव, रघुनाथ - उपासक ॥92॥
 
 
अनुवाद
रामदास विश्वास सभी शास्त्रों के अत्यन्त विद्वान थे। वे प्रसिद्ध काव्य-प्रकाश ग्रंथ के शिक्षक थे और रघुनाथ [भगवान रामचन्द्र] के परम भक्त एवं उपासक के रूप में विख्यात थे।
 
Ramdas Vishwas was well versed in all the authoritative scriptures. He was a teacher of the famous book "Kavya Prakash" and was renowned as an ardent devotee and worshipper of Raghunath (Lord Ramachandra).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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