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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  3.13.91 
पथे तारे मिलिला विश्वास - रामदास ।
विश्वास - खानार कायस्थ तेंहो राजार विश्वास ॥91॥
 
 
अनुवाद
बंगाल में उनकी मुलाकात रामदास विश्वास से हुई, जो कायस्थ जाति के थे। वे राजा के सचिवों में से एक थे।
 
In Bengal, he met Ramdas Biswas, a Kayastha, who was one of the king's secretaries.
तात्पर्य
विश्वास-खाना की कायस्थ शब्दावली एक सचिव या लिपिक का उल्लेख करती है जो कायस्थ जाति से संबंधित है। कायस्थ आमतौर पर राजाओं, राज्यपालों या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों के सचिव हुआ करते थे। यह कहा जाता है कि इस समय सरकारी सचिवालय में काम करने वाला कोई भी व्यक्ति कायस्थ था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)