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श्लोक 3.13.90  |
काशी हैते चलिला तेंहो गौड़ - पथ दिया ।
सङ्गे सेवक चले ताँर झालि वहिया ॥90॥ |
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| अनुवाद |
| रघुनाथ भट्ट अपने सामान को लेकर एक सेवक के साथ वाराणसी से चले और बंगाल से होकर जाने वाले मार्ग पर यात्रा की। |
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| Accompanied by a servant to carry his luggage, Raghunath Bhatt left Varanasi and began his journey via Bengal. |
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