श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  3.13.83 
धाञा यायेन प्रभु, स्त्री आछे अल्प दूरे ।
स्त्री गा य’ बलि’ गोविन्द प्रभुरे कैला कोले ॥83॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु बहुत तेज़ी से दौड़ रहे थे, और वह लड़की कुछ ही दूरी पर थी। तभी गोविंद ने भगवान को अपनी बाहों में पकड़ लिया और चिल्लाए, "यह तो कोई स्त्री गा रही है!"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu was running fast, and the woman was just a short distance away. Just then, Govinda caught Mahaprabhu in his arms and shouted, “There’s a woman singing!”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas