श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.13.79 
गुज्जरी - रागिणी ल ञा सुमधुर स्वरे ।
‘गीत - गोविन्द’ - पद गाय जग - मन हरे ॥79॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने बहुत मधुर स्वर में एक गुज्जरी गीत गाया और क्योंकि विषय जयदेव गोस्वामी का गीत-गोविंद था, इस गीत ने पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया।
 
She sang Gujari Ragini in a very melodious voice and since the theme was 'Geeta Govinda' by Jaydev Goswami, the song attracted the attention of the whole world.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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