श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.13.7 
सूक्ष्म वस्त्र आ नि’ गौरिक दिया राङ्गाइला ।
शिमुलीर तूला दिया ताहा पूराइला ॥7॥
 
 
अनुवाद
उसने एक महीन कपड़ा लिया और उसे लाल ऑक्साइड से रंग दिया। फिर उसमें शिमुला वृक्ष की रूई भर दी।
 
They brought some fine cloth and dyed it with ochre. Then they stuffed it with silk cotton.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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