श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.13.53 
“काहाँ पाइला तुमि एइ रातुल वसन?” ।
‘मुकुन्द - सरस्वती’ दिल, - कहे सनातन ॥53॥
 
 
अनुवाद
जगदानंद ने पूछा, "आपके सिर पर वह लाल वस्त्र कहाँ से आया?" सनातन गोस्वामी ने उत्तर दिया, "मुकुंद सरस्वती ने मुझे दिया था।" सनातन गोस्वामी ने उत्तर दिया, "मुकुंद सरस्वती ने मुझे दिया था।"
 
Jagadananda asked, “Where did you get this red cloth tied around your head?” Sanatana Goswami replied, “Mukunda Saraswati gave it to me.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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