श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.13.48 
सनातन पण्डितेर करे समाधान ।
महावने देन आ नि’ मागि’ अन्न - पान ॥48॥
 
 
अनुवाद
सनातन गोस्वामी जगदानंद पंडित की सभी ज़रूरतों का ध्यान रखते थे। वे महावन क्षेत्र में भिक्षा माँगते थे और जगदानंद के लिए खाने-पीने की हर चीज़ लाते थे।
 
Sanatana Goswami provided for all the needs of Jagadananda Pandit. He would go around Mahavana begging for alms and bring Jagadananda Pandit all the food and drink he needed.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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