श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.13.40 
आमिह आसितेछि , - कहिह सनातने ।
आमार तरे एक - स्थान येन करे वृन्दावने” ॥40॥
 
 
अनुवाद
“सनातन गोस्वामी को सूचित करें कि मैं दूसरी बार वृन्दावन आ रहा हूँ और इसलिए वे मेरे रहने के लिए स्थान की व्यवस्था करें।”
 
“Inform Sanatana Goswami that I am coming to Vrindavan for the second time and he should arrange a place for me to stay.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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