श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.13.35 
केवल गौड़िया पाइले ‘बाटपा ड़’ करि’ बान्धे ।
सब लुटि’ बाँधि’ राखे, याइते विरोधे ॥35॥
 
 
अनुवाद
“जैसे ही सड़क पर लुटेरे किसी बंगाली को अकेले यात्रा करते हुए देखते हैं, वे उसका सब कुछ छीन लेते हैं, उसे गिरफ्तार कर लेते हैं और जाने नहीं देते।
 
“As soon as these robbers see a Bengali travelling alone on the road, they take away everything he has, imprison him and do not let him go.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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