श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.13.2 
जय जय श्री - चैतन्य जय नित्यानन्द ।
जयाद्वैत - चन्द्र जय गौर - भक्त - वृन्द ॥2॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की जय हो! नित्यानंद प्रभु की जय हो! अद्वैत आचार्य की जय हो! और भगवान के सभी भक्तों की जय हो!
 
Victory to Sri Chaitanya Mahaprabhu! Victory to Sri Nityananda Prabhu! Victory to Sri Advaita Acharya! Victory to all the devotees of Mahaprabhu!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)