श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.13.17 
स्वरूप - गोसाञि तबे सृजिला प्रकार ।
कदलीर शुष्क - पत्र आनिला अपार ॥17॥
 
 
अनुवाद
फिर स्वरूप दामोदर गोस्वामी ने एक और तरीका निकाला। सबसे पहले उन्होंने बड़ी मात्रा में सूखे केले के पत्ते इकट्ठा किए।
 
Then Swarup Damodara Goswami devised another trick. He first obtained a sufficient amount of dried banana leaves.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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