vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ
»
श्लोक 120
श्लोक
3.13.120
“आमार आज्ञाय, रघुनाथ, याह वृन्दावने ।
ताहाँ याञा रह रूप - सनातन - स्थाने ॥120॥
अनुवाद
“मेरे प्रिय रघुनाथ, मेरी आज्ञा से वृन्दावन जाओ और वहाँ रूप तथा सनातन गोस्वामी की देख-रेख में रहो।
"O Lord of the Raghus, as I command you, go to Vrindavan. There, live under the protection of the Rupa and Sanatana Gosvamis.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas