श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  3.13.106 
मध्ये मध्ये महाप्रभुर करेन निमन्त्रण ।
घर - भात करेन, आर विविध व्यञ्जन ॥106॥
 
 
अनुवाद
वह समय-समय पर विभिन्न सब्जियों के साथ चावल पकाते थे और श्री चैतन्य महाप्रभु को अपने घर आमंत्रित करते थे।
 
At certain times he would cook rice with various vegetables and invite Sri Chaitanya Mahaprabhu to his house.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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