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श्लोक 3.13.106  |
मध्ये मध्ये महाप्रभुर करेन निमन्त्रण ।
घर - भात करेन, आर विविध व्यञ्जन ॥106॥ |
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| अनुवाद |
| वह समय-समय पर विभिन्न सब्जियों के साथ चावल पकाते थे और श्री चैतन्य महाप्रभु को अपने घर आमंत्रित करते थे। |
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| At certain times he would cook rice with various vegetables and invite Sri Chaitanya Mahaprabhu to his house. |
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