श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  3.12.99 
चैतन्येर मर्म - कथा शुने ताँर मुखे ।
आपना पासरे सबे चैतन्य - कथा - सुखे ॥99॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने जगदानन्द पंडित के मुख से श्री चैतन्य महाप्रभु के विषय में गोपनीय कथाएँ सुनीं और भगवान के विषय में सुनने के महान् आनन्द में अपने को भूल गये।
 
He heard the secret stories of Sri Chaitanya Mahaprabhu from the mouth of Jagadananda Pandit and he forgot himself in the great joy of hearing about Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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