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श्लोक 3.12.83  |
निज - कृपा - गुणे प्रभु बान्धिला सबारे ।
महाप्रभुर कृपा - ऋण के शोधिते पारे ? ॥83॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान ने अपनी दिव्य कृपा से सबको बाँध रखा है। श्री चैतन्य महाप्रभु की कृपा का ऋण कौन चुका सकता है? |
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| Mahaprabhu has bound everyone with his divine grace. Who can repay this debt of Sri Chaitanya Mahaprabhu's grace? |
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