श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  3.12.75 
प्रभुर वचने सबार द्रवी - भूत मन ।
अझोर - नयने सबै करेन क्रन्दन ॥75॥
 
 
अनुवाद
जब सभी भक्तों ने भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के ये मधुर वचन सुने, तो उनके हृदय पिघल गए और वे लगातार आँसू बहाने लगे।
 
When all the devotees heard these sweet words of Sri Chaitanya Mahaprabhu, their hearts melted and they started shedding tears continuously.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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