श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.12.63 
प्रभुर प्रिय नाना द्रव्य आनियाछे देश हैते ।
सेइ व्यञ्जन क रि’ भिक्षा देन घर - भाते ॥63॥
 
 
अनुवाद
बंगाल से भक्तगण श्री चैतन्य महाप्रभु को पसंद आने वाले विविध बंगाली व्यंजन लाए थे। उन्होंने अपने घरों में विभिन्न प्रकार के अनाज और सब्ज़ियाँ भी पकाईं और प्रभु को अर्पित कीं।
 
The devotees brought with them from Bengal a variety of Bengali food, which Sri Chaitanya Mahaprabhu loved. They also cooked various cereals and vegetables in their homes and offered them to Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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