श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.12.51 
शिवानन्देर भाग्य - सिन्धु के पाइबे पार? ।
याँर सब गोष्ठी के प्रभु कहे ‘आपनार’ ॥51॥
 
 
अनुवाद
शिवानन्द सेना के सौभाग्य रूपी सागर को कोई पार नहीं कर सकता, क्योंकि भगवान ने शिवानन्द के सम्पूर्ण परिवार को अपना ही माना है।
 
No one can cross the ocean of good fortune of Shivananda Sen, because Mahaprabhu considered the entire family of Shivananda as his own.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)